साइटिका (गृध्रसी) की प्रकृतिक चिकित्सा हिन्दी में – Sciatica

साइटिका (गृध्रसी) की प्रकृतिक चिकित्सा हिन्दी में – Sciatica

साइटिका (sciatica) नाडी, जिसका उपरी सिरा लगभग १ इंच मोटा होता है, प्रत्येक नितंब के नीचे से शुरू होकर टाँग के पिछले भाग से गुजरती हुई पाँव की एडी पेर ख़त्म होती है| इस नाडी का नाम इंग्लीश में साइटिका नर्व है| इसी नाडी में जब सूजन ओर दर्द के कारण पीड़ा होती है तो इसे वात शूल अथवा साइटिका का दर्द कहते है| इस रोग का आरंभ अचानक ओर तेज दर्द के साथ होता है| ३० से ५० वर्ष की आयु वर्ग के लोगों को यह रोग होता है| साइटिका का दर्द एक समय मे सिर्फ़ एक ही टाँग मे होता है| सर्दियों के दिनो में रोगियों के दर्द मे बढ़ोतरी होती है| किसी किसी को कफ का प्रकोप भी दिखाई देता है| रोगी को चलने मे कठिनाई होती है| रोगी जब सोता या बैठता है तो टाँग की पूरी नस खींच जाती है ओर बहुत तकलीफ़ होती है|

साइटिका की प्रकृतिक चिकित्सा

१. गरम पानी में १० से १५ मिनिट तक रोज पाँव रखना|
२. आधी बाल्टी पानी उबलने को रखें| इसमें ३० -४० पत्तियाँ नीम की डालकर उबालें| उबलते पानी मे थोड़ा सा मेथी दाना व काला नमक डालें| अब इसे छाने| अब इस गरम पानी को बाल्टी मे डालें व सुहाते सुहाते पानी के अंदर दोनो पैरों को डालकर बैठें व शरीर के चारो तरफ कंबल लपेट लें| कम से कम १० मिनिट तक बैठें| इसके बाद पैर बाहर निकाल कर पोंछ लें| ऐसे सप्ताह मे एक बार ज़रूर करें|

खाद्य चिकित्सा द्वारा उपचार

(१) २५० ग्राम पारिजात के पत्तों को एक लिटर पानी में उबालें| जब लगभग ७०० ग्राम पानी बचे तब उसे छान लें| अब उसमें एक ग्राम केसर पीस के दल दें| ठंडा कर उसे बोतल मे भर लें| इसको रोजाना ५० – ५० ग्राम सुबह ओर शाम लें| यह उपचार कम से कम ३० दिनों तक लगातार करें| ज़रूर लाभ होगा| पानी खत्म होने पर दुबारा बना लें| पारिजात को हारसिंगार भी कहा जाता है|
(२) १०० ग्राम नेगड़ के बीज किसी पंसारी से लाकर कूट पीस लें| १० छोटे पॅकेट बना लें| सुबह सूर्योदय से पहले उठ कर कुल्ला कर मुह सॉफ करें| अब सूजी या आटे का हलवा शुद्ध देसी घी मे बनाएँ| जितना हलवा खा सकते है उसको अलग निकालें ओर इसमें एक पेकेट नेगड़ के चूर्ण की मिला कर खाएँ| खाने के बाद पानी ना  पिएं| हो सके तो हलवे मे शक्कर की जगह गुड मिलाएँ| कम से कम १० दिन तक प्रयोग करें|

(३) अजवाइन १० ग्राम, सूखा आँवला २० ग्राम, मेथी दाना २० ग्राम व काला नमक ५ ग्राम लेकर पीसें| रोजाना इसमें से १ चम्मच चूर्ण लें|
(४) प्रतिदिन २ कली लहसुन की व थोड़ी सी अदरक खाने के साथ लें|
(५) काली मिर्च ५ तवे पेर सेंक कर सुबह खाली पेट मक्खन के साथ लें|
(६) हरी मेथी, करेला, लौकी, टिन्डे, पालक, बथुआ का ज़्यादा सेवन करें|
(७) फलों मे पपीता, अंगूर आदि का सेवन करें|
(८) सूखे मेवों मे किशमिश, अंजीर, अखरोट, मुनक्का आदि का सेवन करें|

sciatica home remedies साइटिका की प्रकृतिक चिकित्सा हिन्दी में

व्यायाम व योग द्वारा साइटिका का इलाज़

१. कमर के बल सीधे लेटें| दोनों पैरों को बिना घुटना मोड़ें उपर उठाएँ| कम से कम १० से २० बार करें|
२ दोनों पाँवो को मोड़ कर घुटने पेट से लगाकर नाभि को दबाएँ|
३. सीधे लेटकर घुटने मोडते हुए साइकल की तरह चलाएँ|
४. भुजंगासन, वज्रासन, उत्तानपादासन, नौकासन व शवासन करें|

परहेज

१. जहाँ तक हो सके दालों का सेवन ना करें| सिर्फ़ छिलके वाली दाल थोड़ी मात्रा मे खाएँ|
२. तेल, खटाई, मिठाई, दही, आचार, राजमा, छोले आदि का प्रयोग ना करें|
३. तली हुई चीजें ना खाएँ| ठंडे पेय पदार्थ ना पिएं|

विशेष

१. ५ पत्ती तुलसी की रोज सुबह खाएँ|
२. चिंता व क्रोध ना करें|
३. प्रतिदिन पैरों की सरसों के तेल से उपर से नीचे की ओर मालिश करें| इस तरह थोड़े से परिश्रम से आप साइटिका के दर्द से मुक्ति पा सकते है|