बुखार का घरेलू इलाज़

बुखार का घरेलू इलाज़

1. मलेरिया बुखार का घरेलू इलाज़: सादा खाने का नमक पीसा हुआ लेकर तवे पर इतना सेंके की उसका रंग काला भूरा हो जाएँ| ठंडा होने पर शीशी मे भर लें| बस दवा तैयार है जो की मलेरिया, विषम ज्वर की खास दवा है|  बुखार आने से पहले 6 ग्राम गर्म पानी से ओर बुखार उतर जाने पर भी 6 ग्राम गर्म पानी से सेवन करना चाहिए| बस इन २ खुरको के लेने से बुखार उतर जाएगा ओर फिर नहीं आएगा| अगर दूसरी बार बुखार फिर भी आ जाए तो यही खुराक वापस लेनी चाहिए| तीसरी बार बुखार बिल्कुल नहीं आएगा| अगर यह भूना हुआ नमक अजवाइन व हल्दी के साथ लें तो पेट दर्द, पुरानी कब्ज व पेट के कीड़ों मे भी लाभदायक है|
विशेष: उच्च रक्तचाप के रोगी नमक का प्रयोग ना करें| पेट में हवा भर जाने पर पिसि हुई हल्दी 1 ग्राम ओर नमक १ ग्राम मिलाकर गर्म पानी से लेने से लाभ मिलता है|

बुखार का घरेलू इलाज़-fiver-home-remedies
2. सादा नमक को साफ लोहे के तवे पर इतना भून लें की वह भूरा हो जाएँ| बच्चों के लिए आधा व बडो के लिएन १ चम्मच यह नमक लेकर १ गिलास पानी मे उबाल लें. जब नमक पूरी तरह घुल जाएँ तो इसे गुनगुना ही उस समय रोगी को पिला देना चाहिए जब उसे बुखार ना चढ़ा हो| इससे 90% रोगियों को दुबारा बुखार चढ़ेगा ही नहीं ओर यदि किसी कारण बुखार आ जाएँ तो यही इलाज़ वापस करने से 100% लाभ होगा| इसके साथ ही रोगी को सर्दी से बचाने पर भी ध्यान देना चाहिए| यह इलाज़ भूखे पेट ही करना चाहिए क्योकि इसका प्रभाव भूखे पेट ही होता है|
3. तेज बुखार आने से पहले करन्ज की एक गिरी का बारीक चूर्ण गर्म पानी के साथ व बुखार उतरने के बाद भी करन्ज की एक गिरी का बारीक चूर्ण गर्म पानी के साथ लेना चाहिए| दूसरी बार बुखार वापस नहीं. होगा| अगर वापस बुखार हो जाएँ तो दूसरे दिन भी यही चूर्ण गर्म पानी से दें| तेज ज्वर की यही सबसे अच्छी दवा है| बुखार के बाद की कमज़ोरी भी इसके सेवन से दूर हो जाती है| शारीरिक पीड़ा में यह एस्पिरीन के समान है| पेट दर्द, पेट के कीड़ों व खाज खुजली में भी लाभदायक है|
4. किसी भी प्रकार का बुखार होने पर सौंठ, छोटी पीपर, काली मीर्च, सैन्धा नमक, अजमोद, सूखा पोदीना, पित्त पापडा व नीम गिलोय ये सब 6-6 ग्राम की मात्रा में लें व साफ करने के बाद अलग अलग सबका चूर्ण बना लें|

यदि तेज बुखार हो यानी यदि ताप 101 डिग्री से अधिक हो तो सभी आठों ओषधियों के चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर काम में लें. यदि बुखार 101 से नीचे हो तो ज्वर में नीम गिलोय 2/3 की मात्रा में मतलब 4 ग्राम इन ओषधियों में मिलकर लेना चाहिए|
सेवन विधि: यह चूर्ण बड़ों के लिए 6 ग्राम (बच्चों के लिए 3 ग्राम) की मात्रा लेकर थोड़े पानी के साथ बारीक पीस लें ओर ऐसा घोल बना लें जो न गाढ़ा ओर ना ही पतला| चूर्ण को पानी के साथ जितना पतला पीसेंगे उतना ही यह प्रभावशाली होगा. अब इस पेस्ट को किसी काँसे की कटोरी को थोड़ा गर्म कर उसमें डालें जिससे यह थोड़ा गुनगुना हो जाएँ| यदि काँसे की कटोरी ना मिले तो पीतल की कलई वाली कटोरी काम में लें| अब इस गुनगुने पेस्ट को रोगी को खाली पेट थोड़ा सादा नमक डालकर तुरंत एक घूँट मे पीला दें| बच्चों को उपर से एक दो घूँट सादा पानी पिला सकते है| इस्र रोगी को सुबह खाली पेट देने से 2-3 दिन मे ही बुखार उतर जाता है|

विशेष परहेज: काचरी ना खाएँ| हल्का सुपाच्य भोजन करें|

5. किसी मिट्टी के बर्तन में १० ग्राम अजवाइन ओर २ बड़ी पीपर आधा कप पानी में 24 घंटो के लिए भिगो दें| प्रातः उसी पानी में अजवाइन व पीपर को पीस कर पेस्ट बना लें| रोजाना प्रातः यह पेस्ट बनाकर आवश्यकता अनुसार 15 दिन टके लेने से पुराना से पुराना बुखार भी ठीक हो जाता है| कफ ज्वर मे विशेष मे लाभकारी है|
६. 10 ग्राम अजवाइन मिट्टी के कोरे बर्तन मे 100 ग्राम पानी में प्रातः भिगो दें ओर उस बर्तन को दिन में छाया वाले स्थान में व रात में ओस मे खुले में रख दें| दूसरे दिन प्रातः उसका निथरा हुआ पानी रोगी को पिला दें| इस प्रकार अजवाइन वाले पानी के सेवन से कुछ ही दिनों में कफ वाला ज्वर उतर जाता है| इसके अतिरिक्त इससे पुरानी कब्ज, पेशाब का पीलापन, जिगर, आमशया व कफ वाले विकार ओर पसली आदि की सूजन की शिकायत भी ठीक हो जाती है|