नारू बाला रोग का रामबाण इलाज़ (Guinea worm treatment)

नारू बाला रोग (Guinea worm) धागे जैसे कीट से होने वाला रोग है जो मनुष्य के शरीर में परिपक्व होने के बाद त्वचा को छेदकर भ्रूण छोड़ने के लिए बाहर निकल जाता है| मादा कीट लगभग १ मीटर लंबी होती है| जब नारू बाला कीट टाँग या हाथ के किसी विशेष स्थान पर निकलता है तो वहाँ पहले खारिश होती है फिर वह स्थान लाल होकर एक फफोला सा बन जाता है| इसके बाद त्वचा फट जाती है ओर कीट का एक भाग सफेद तरल पदार्थ के साथ असंख्य भ्रूण छोड़ता हुआ निकल पड़ता है| इस निकलते हुए नारू बाला कीट को पकड़कर बाहर खींचने से कई बार कीट पूरा बाहर ना निकलकर बीच से टूट जाता है ओर टूटा हुआ जो भाग शरीर में रह जाता है वह परेशानी पैदा करता है| अतः शरीर में से कीट को खींचकर निकालने की कोशिश नही करनी चाहिए| इस टाइम रोगी को सिर दर्द, बुखार, अधिक आलस ओर उल्टी के साथ दस्त आदि हो सकते है| यह रोग अधिकतर गंदे पानी से होता है जो 4 से 6 महीनो तक बना रहता है|

नारू बाला रोग का रामबाण इलाज़ (Guinea worm treatment)

नारू बाला रोग विशेषकर राजस्थान के नागोर, पाली, जालोर, बाड़मेर, जोधपुर आदि के कई गावों मे देखा गया है| इस नारू बाला रोग के कीटाणु शरीर के किसी भी भाग को छेदकर बाहर निकल आते है- जैसे अगर यह रोग घुटनों में हो गया तो मनुष्य तो उमर भर के लिए लंगड़ा कर सकता है, आँखो में निकल आए तो काना या अँधा कर सकता है| ज़ुबान से निकल आए तो गूंगा कर सकता है| अधिकतर यह बाला टाँग से निकलता है परन्तु शरीर के किसी भी भाग से निकल सकता है| कभी-कभी कहीं कहीं पर तो शरीर मे 25-25 बाले भी निकल आते है| यह एक लंबे समय तक चलने वाला कष्ट दायक रोग है किंतु यह जानलेवा नहीं होता है| इस रोग के होने पर एलोपेथि में इसका कोई इलाज़ नहीं है लेकिन जो इलाज़ आपको उपर बताया गया है वह इतना प्रभाव कारी है की सिर्फ़ एक ही खुराक से शरीर में मौजूद सारे बाला कीट 2-3 दिन के अंदर ही गलकर पानी हो जाते है व रोगी को कोई कष्ट नहीं होता है| ध्यान रहे की दवा को दही के साथ ही लेना है| यदि रोगी खाना खाए बिना 24 घंटे नहीं रह पाएँ तो शाम को या दोपहर बाद वह हल्का भोजन कर सकता है| इस रोग को रोकने के लिए किसी झील, तालाब या बावड़ी का पानी ऊबालकर ठंडा करके व किसी सॉफ कपड़े से फिल्टर करके ही पिएं|

नारू बाला रोग का रामबाण इलाज़ – Dracunculus medinensis or Guinea worm

1. कली का चूना 6 ग्राम को 750 ग्राम गाय के शुद्ध दही मे अच्छी तरह से मिलकर प्रातः खाली पेट बाला के रोगी को पिला दें| फिर दिन भर छाछ व पानी के अलावा रोगी को कुछ ओर नही खाना चाहिए| 24 घंटे बाद दूसरे दिन हल्का सुपाच्य भोजन करें| इसी से बाला (नाहरू) निकला हुआ हो, निकालने वाला हो, निकल चुका हो यानी बाला रोग के सभी प्रभाव 8 दिन में समाप्त हो जाएँगें| इस इलाज़ से फिर कभी ये रोग नहीं होगा| यह इलाज़ सबसे कारगर व 100% प्रभाव दिखाने वाला सबसे अच्छा इलाज़ है इस रोग का|
परहेज: 8 दिन तक रोगी ठंडी हवा व छाया में ही रहना चाहिए| धूप गर्मी मे घूमना, काम करना बंद करदे अथार्थ ज़्यादा मेहनत व धूप से अपने आप को बचाना चाहिए|