चुम्बक चिकित्सा – Magnetic Therapy

चुम्बक चिकित्सा – Magnetic Therapy

चुम्बक चिकित्सा : इस पूरे संसार की आधारशिला चुम्बकत्व की शक्ति है| चुम्बकत्व के कारण ही आकाश की विभिन्न ग्रह एक – दूसरे से जुड़े रहते है| धरती हो या सूर्य, चंद्रमा हो या दूसरे ग्रह उन सभी से एक चुंबकीय शक्ति निकलती है जिसका हमारे जीवन पेर गहरा प्रभाव पड़ता है|

मानव का शरीर अपने आप में एक चुंबक के समान है| खड़े इंसान को लिया जाए तो सिर की ओर धड़ ‘उत्तरी ध्रुव’ ओर पैरों को ‘दक्षिणी ध्रुव’ माना जाता है| यदि हम पीठ के बाल लेटे हुए है तो हमारे शरीर के दाहिनी हिस्से के अंगो को ‘उत्तरी ध्रुव’ ओर बाएँ हिस्से के अंगो को दक्षिणी ध्रुव’ माना जाता है| ओर जब हम बैठें हो तो शरीर के अगले भाग के अंगो को, जैसे – माथा, चेहरा, छाती ओर पेट को ‘उत्तरी ध्रुव’ ओर पिछले भाग, जैसे रीढ़ आदि को ‘दक्षिणी ध्रुव’ कहेगें| प्रकर्ति आइयी नियमों के अनुसार चलते हुए कोई काम किया जाए तो उससे शांति मिलती है| इस कारण सोते समय सिर पूर्व की तरफ ओर पैर पश्चिम की तरफ होने चाहिए| जब सिर पूर्व की तरफ होगा तो हमारे शरीर का दाहिना भाग उत्तर की ओर व बायां भाग दक्षिण की तरफ होगा| इससे अच्छी नींद आती है ओर स्वास्थ मे सुधार होता है| यह इस कारण है की उस दिशा मे शरीर धरती की चुंबक की दिशा मे होता है ओर उस चुंबक की किरण शरीर पेर अक्चा प्रभाव डालती है|

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मानव के अंदर भी चुंबक का अपना अस्तित्व होता है| बहुत बार हम खुद महसूस करते है की कुछ लोगो को देखते ही हम उन्हे अनायास ही पसंद करने लगते हैं या नफ़रत करने लगते हैं| इस प्रकार का रवैया बड़ा ही अजीब होता है, क्योंकि ऐसा हम किसी दोस्ती या दुश्मनी के एवज मे नहीं करते है बल्कि उसकी चुंबकीय शक्ति के प्रभाव के कारण करते हैं|

शरीर की आंतरिक गर्मी ओर बाहर से लगाए गये चुंबक की गर्मी के प्रभाव से शरीर की ग्रंथियों से निकलने वाले हार्मोनो मे सुधार होता है| चुंबक शरीर को रोगो से लड़ने ओर उनसे छुटकारा पाने की शक्ति देता है|

चुम्बक चिकित्सा - Magnetic Therapy

चुम्बक चिकित्सा करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

१. अगर रोग शरीर की उपरी भाग यानी की नाभि से ऊपर के अंगो में हो तो रोगी की दोनों हथेलियों पर चुंबक लगाना चाहिए ओर यदि नाभि के नीचे हो तो चुंबक का प्रयोग पैरों के दोनो तलुओं के नीचे लगाकर करना चाहिए|
२. अगर रोग सारे शरीर मे फैल गया हो तो सुबह दोनो हथेलियों के नीचे व शाम को दोनो तलुओं के नीचे चुंबक लगाना चाहिए|
३. चुम्बक चिकित्सा प्रतिदिन १०-१५ मिनिट तक करनी चाहिए| लेकिन गठिया, पक्षाघात, जोड़ों की सूजन में १५-१५ मिनिट तक चुम्बक चिकित्सा की जा सकती है|
४. ‘उत्तरी ध्रुव’ का गुण धर्म यानी तासीर ठंडी होती है| यह ऊष्णता को कम करता है| इस कारण ‘उत्तरी ध्रुव’ का प्रयोग उच्च रक्तचाप, चर्म रोगो, कान व दाँत का दर्द, जोड़ों का दर्द, फोड़े – फुंसियों को ठीक करने के लिए किया जाता है|
५. दक्षिणी ध्रुव की तासीर गर्म होती है| इस कारण निम्न रक्तचाप, कमर दर्द, पेर के रोग, गैस ट्रबल, माँस पेशियों की दुर्बलता आदि रोगो में दक्षिणी ध्रुव द्वारा चुंबक चिकित्सा करनी चाहिए|
६. चुम्बक चिकित्सा के वक़्त रोगी को लकड़ी की कुर्सी या तखत पर बैठना चाहिए या लेटना चाहिए व पैरों के तलवों के नीचे लकड़ी की छोटी टेबल रख कर उस पर चुंबक रखना चाहिए|
७. चुंबक का प्रयोग सुबह खाली पेट करना अच्छा रहता है| उपचार के तुरंत बाद ठंडी चीज़ें जैसे-फ़्रीज़ का पानी, आइस क्रीम आदि नही लेनी चाहिए|
८. चुंबक के उत्तरी ध्रुव को शरीर के दाहिने भाग पर, व चुंबक के दक्षिणी ध्रुव को बाएँ भाग वाले हिस्से पेर प्रयोग करना |
९. खाना खाने के तुरंत बाद चुंबक का प्रयोग नहीं करना चाहिए|
१०. शक्तिशाली चुंबकों का प्रयोग आँख, कान, नाक, ह्रदय व दिमाग के रोगों मे नहीं करना चाहिए|

११. आँखों की बीमारी में उत्तरी ध्रुव पर एक काँच की बोतल में पानी भरकर रखें| ४ घंटे बाद उस पानी से आँखें धोने से आँखों के रोग में लाभ मिलता है|
१२. दक्षिणी ध्रुव वेल चुंबक पेर पानी, दूध या फलों का रस काँच के गिलास मे डालकर आधा घंटा रखें| इसके पीने से दुर्बल या बीमार व्यक्ति को शक्ति मिलती है|
१३. घुटनें का दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द में चुंबक द्वारा तैयार वातनाशक तेल से मालिश करनी चाहिए| इसके लिए लाल रंग की काँच की बोतल में नारियल तेल भरकर चुंबक के दक्षिणी ध्रुव के उपर २१ दिन तक रखने से तेल तैयार हो जाता है| अब इस तेल से मालिश करने से वातनाशक दर्द ठीक होते हैं|

१४.  गर्दन के दर्द से छुटकारा पाने के लिए चुंबकीय सरवाइकल बेल्ट २० मिनिट प्रतिदिन लगा कर रखनी चाहिए|
१५. कमर दर्द दूर करने के लिए चुंबक द्वारा निर्मित कमर बेल्ट रोजाना ३० मिनिट तक लगाकर रखने से लाभ होगा|
१६. आँखों की थकान, कमज़ोरी दूर करने के लिए 15 मिनिट तक चुंबकीय चश्मा पहनना चाहिए|
१७. माइग्रएन ओर सिर दर्द में चुंबकीय सिर की बेल्ट 15 मिनिट से ३० मिनिट तक पहनने से लाभ होता है|
१८. उच्च रक्तचाप में चुंबकीय बेल्ट को दाहिने हाथ में व निम्न रक्तचाप में चुंबकीय बेल्ट को बायें हाथ में पहनने से लाभ होता है|
१९. सांस की तकलीफ़, जुकाम, खाँसी, दमा आदि रोगों में चुंबक व तुलसी की बनी माला पहनना चाहिए|
२०. घुटने के दर्द मे चुंबक तेल से मालिश कर चुंबकीय घुटने की बेल्ट प्रतिदिन ३० मिनिट पहनना चाहिए|

चुंबक द्वारा पानी तैयार करने की विधि

सबसे पहले २ काँच की बोतलें अच्‍छी तरह साफ करलें| उनमे सॉफ पानी भर दें| अब उत्तरी ध्रुव व दक्षिणी ध्रुव वाले चुंबको को लकड़ी की टेबल या चौकी पेर रखें| इन दोनों ध्रुवों पेर एक एक बोतल पानी भरकर रखें| 8 घंटे बाद वह पानी चुंबकीय गुणों से भरपूर हो जाएगा| अब दोनो बोतलों में से 15-15 ग्राम पानी लें| इस पानी को पीने से कमज़ोरी, दुर्बलता आदि मे यह टॉनिक का काम करता है| इसी प्रकार दोनो बोतलों में समान मात्रा में पानी लेकर आँखे धोएँ या बाल धोएँ या कील मुहासें हो तो चेहरा धोने से लाभ मिलता है|
पहले के जमाने मे लोग खाना बनाने के लिए लोहे की कढ़ाई के प्रयोग करते थे| इसी प्रकार नहाने के लिए लोहे की बाल्टी का प्रयोग करते थे जिससे उनमे लोह तत्व की कमी नहीं रहती थी लेकिन आज लोग नों स्टिक व प्लास्टिक का उसे करते हे जिससे लोग कमजोर बनते जा रहें हैं| इस कमी को पूरा करने के लिए चुंबकीय चिकित्सा बहुत ही उपयोगी है|